बरेली प्रशासन की क्रूरता का परिचायक है मजदूरों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव।


बरेली में घर लौटते हुए प्रवासी मजदूरों पर जो अत्याचार किया गया है। ये बरेली प्रशासन की क्रूरता की पराकाष्ठा है। सवाल उठता है कि ये आदेश किसने दिया कि इंसानों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाय । जहाँ तक मेरी समझ कहती है निम्न स्तर के कर्मचारियों द्वारा ये कार्य नही किया जा सकता है क्योंकि वे जानते है कि ये दवाई कितनी घातक है।क्योंकि उनका सामना रोज होता है इस दवाई से वो स्वंम जख्मी हो।जाते हैं छिड़काव करते समय। इसमें जरूर किसी उच्चाधिकारी का आदेश शामिल होगा।

सबसे शर्मनाक बयान बरेली के जिला मजिस्ट्रेट का है कहते हैं कर्मचारियों की अतिसक्रियता के चलते हुआ है और अब वे उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे।


हम बरेली प्रशासन से मांग करते है कि सभी मजदूरों की लिस्ट व उनकी स्थिति की जानकारी को सार्वजनिक करे क्योंकि उनमें बच्चे, बूढ़े और औरतें भी शामिल थीं ।


क्या प्रशासन मजदूरों को कीड़े मकोड़े समझता है क्या प्रशासन के नुमाइंदों में इंसानियत ही नही बची है। क्या ये समाज का हिस्सा नही हैं।

सरकार और सरकार के नुमाइंदों को ऐसी आपातकाल में बहुत ही संवेदनशील होना चाहिए। ऐसे में उनको प्रत्येक इंसान की सुरक्षा एक ही मापदंड से करनी चाहिए । शायद इस समय भी समानता नही बरती जा रही है अभी भी समाज को भेदभाव की नजर से देखा जा रहा है।

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