मजदूर की भूख गाँव से शहर और शहर से गाँव "कोरोना "



मजदूर जो किसी देश की अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी होती है जो देश को प्रगति को और ले जाते है जिनकी मेहनत से बड़े बड़े शहर महानगर बसाय जाते है जिन्होंने ने शहर बनाया आज वही शहर मजदूर को नहीं अपना पा रहा है | गाँव का गरीब मजदूर जिस भूख को शांत करने के लिए शहर आया था आज फिर वही भूख शहर से गाँव की तरफ अपनी जान को खतरे में रखकर जाने को मजबूर है | आज भूख इस कदर मजदूरों पर हावी है की लाख सरकारों के इंतजाम लाख सरकारों के दावे इनका भरोसा नहीं जीत पा रहे हैं |



शायद सरकारी इंतजामो में कुछ कमी है शायद सरकारी इंतजाम सही प्रकार से लोगो की पहुच में नहीं है या कोई कानूनी अड़चन है जो इनको सरकारी सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं | सुनने में आया है की पका हुआ भोजन भी आधार कार्ड धारक को ही दिया जा रहा है यदि ये सत्य है तो मेरी नजर में ये मानवीय नहीं है पका भोजन वो इंसान ही लेगा जो सच में भूख है हाँ कच्चा राशन में गड़बड़ी हो सकती है उसके लिए दस्तावेज देखा जा सकता है लेकिन इस महामारी के संकट में जब पता ही न हो की ये कब समाप्त होगा ऐसी सूरत में कच्चा पक्का राशन सभी को वितरित करना चाहिए और कुछ ऐसा तरीका निकलना चाहिए की सभी को भोजन की कमी न हो |



आज के दौर में तो हम ये भी अंदाजा नहीं लगा सकते की कौन जरूरत मंद है कौन नहीं है आज ये अंतर करने का भी समय नहीं है मुझे लगता है की सभी को एक तरफ से राशन मुहिया कराया जाए ताकि कोई भी भूखा न रहे | क्योंकि आज की परिस्थति में अमीर दिखने वाला व्यक्ति भी परेशान है और सभी की अपनी परिस्थति होती है न जाने किसके साथ कैसी परिस्थति है ये जानना बहुत ही मुस्किल  का काम है आज किसी के रहन सहन घर आदि से स्थति का पता नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि किसी को नहीं पता था की इतनी बड़ी समस्या आ जायेगी और इस तरह की परिस्थति पैदा हो जायेगी नहीं तो सामान्य समय में सभी अपना गुजरा किसी प्रकार से कर ही रहे थे वे किसी से ऐसी गुहार नहीं लगा रहे थे की वे भूखे मर जायंगे वे कर्जा लेकर भी अपने स्थति को सुधारने की कोशिस में लगे हुये थे |


आज के संकट की परिस्थति में सरकार को बिना किसी दस्तावेज के अपनी जनता का पेट भरने की हर संभव कोशिस करना चाहिए ताकि सभी मजदूर कम से कम वे भूख की तड़प से अपने गाँव की तरफ न भागें और जो ये वैश्विक महामारी आई है इस विपत्ति से लड़ाई में वे भी योगदान कर सकें |

अभी तक अधिकतम जनता को ये भी नहीं पता है की कैसे राशन या पका हुआ खाना प्राप्त किया जा सके | मुझे बड़े अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है की सरकारी हेल्पलाइन और जिलाधिकारी के संपर्क में अभी भी दम नहीं है वे अभी भी इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं शायद ये ही कारण है की लगातार अलग अलग शहरों से मजदूरों के पलायन करने या कोशिस की खबरें लगातार आ  रही है अभी भी मजदूरों के काफी समूह कहीं कही फंसे पड़े हैं उन तक कोई भी किसी प्रकार की सुविधा नहीं पहुच पा रही है कही तो लोग बंद के चलते पुलिस के डर से ये देखने की भी कोशिस नहीं कर रही हैं की कहाँ पर क्या सुविधा मिल रही है और लोकल अधिकारी इस कार्य में नाकाम सिद्ध हो रहे हैं |



मुझे लगता है की इस कार्य में जो लोग लगे है उनकी गलती नहीं है परन्तु इनके टीम का संचालन किसी भी संवेदनशील व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा रहा है ऐसे समय  में ऐसे व्यक्तियों की अवस्कता होती है जो समाज व मनुष्य को भलीभांति समझता हो उनकी भवना को समझता हो |

सरकार से हम प्रार्थना करते हैं की इस कार्य में सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं व उनसे जुड़े लोगों को शामिल किया जाए ताकि इस कार्य को अपने लक्ष्य तक पहुचने में आशानी हो  और देश कोरोना वैश्विक महामारी में विजय प्राप्त कर


17 views

​​Call us:

+91 8800 1300 41

​Find us: 

SH 296, 2nd Floor, H Block, Shastri Nagar, Ghaziabad 201002 (Opposite: Uttam School)

Email: contact@labourissuewatch.org