महामारी, बेरोजगारी और भुखमरी


कोरोना वैश्विक महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है।हम भारतीय परिवेश में बात करते हैं। सच मे बहुत डरावना है सम्पूर्ण विश्व के राजनेता वैज्ञानिक इस समस्या पर जीत हासिल करने में दिन रात एक करके कार्य कर रहे हैं। साथ ही पूरे विश्व की जनता भी अपनी सरकारों का इस विकट परिस्थिति में सहयोग कर रही है।


पिछले काफी समय से आर्थिक मंदी के चलते भारत बेरोजगारी का संकट को भी झेल रहा है हम आर्थिक मंदी व बेरोजगारी के संकट से निपट नही पाए थे कि कोरोना नामक महामारी ने पूरे विश्व को घेर लिया। परेशानी का समय है सभी नागरिक देश की सरकार के हर फैसले का पुरजोर समर्थन कर रही है। परंतु हम उन बेरोजगारों की समस्या को ध्यान में लाना चाहते हैं जो आर्थिक मंदी के चलते लंबे समय से बेरोजगार है और अब नये रोजगार की इस समय कल्पना भी बेमानी है। कुछ लोग ये भी कह सकते हैं कि अभी जो भारी संकट है उसकी बात करो रोजगार बाद में देख लेंगे। परंतु असली मुद्दा ये है कि जो लोग काफी समय से बेरोजगार थे और उनके पास कोई आर्थिक मजबूती नही थी बल्कि बे लगातार कर्ज में डूबते जा रहे थे । अब आज की परिस्थिति में उन बेरोजगारों की हालत और उनके परिजनों की हालत भुखमरी के कगार पर है। अब पहला संकट भुखमरी का है महामारी का नहीं।


और सरकार द्वारा जो घोषणायें की भी गयी है। भारत जैसे देश में समान वितरण या जरूरत मंद को सेवाएं पहुचे ये भी गारंटी नही है। हम ये कोई आरोप नही लगा रहे न ही हमे अपनी सरकार की क्षमता पर कोई प्रश्रचिन्ह है हमें भूतकाल में दी गयी सेवायों का अनुभव के आधार पर शंका है।


हम आशा करते हैं कि इस संकट की घड़ी में कोई भी भूखा न तड़पेगा और हमारी सरकार और प्रशासन इसका भलीभांति ध्यान रखेंगे ।

-उमेश चन्द्र

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