लॉकडाउन में भुखमरी का डर से शहरों को छोड़ते मजदूर व सरकारी घोषणाओं के प्रति असन्तोष ।


फ़ोटो: इस्मत आरा

क्यों सरकार ऐसे लोगो का विश्वास हासिल करने में असफल है कहाँ हैं हमारे राजनेता जो इलेक्शन के समय जनता के पैरों में लेटने का स्वांग करते है। कहाँ गए पार्टी के वो कार्यकर्ता जो अपनी पार्टी की गाथा गाते नहीं थकते । कहाँ गए वो गैर सरकारी संस्थायें जो करोडों रु की मद प्राप्त करतें हैं ।


है कोई जो इनको विश्वाश दिला सके कि आप जहाँ हैं वहीं रुकें हम आपके जीवन की रक्षा करेंगे।हम आपको भूख से नही मरने देंगे हम हैं आपको चिंता की कोई बात नही है।


शायद चिंता ठीक ही है ये वो ही लोग हैं जिनके लिये सरकार न्यूनतम वेतन तक लागू करने में अपंग दिखती है और इनके लिए न्यूनतम ही तय किया जाता है चाहे वे अपने काम मे जीवन का बड़ा ही दे चुके हो। ये वो लोग हैं जिनको सरकार असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी कहती है इसका मतलब ये होता है कि देश के कानून द्वारा जो भी राहत है इनके लिए नही है।


सामाजिक सुरक्षा के नाम पर ठेंगा ही इनके नाम पर है। इनकी चाहे काम के दौरान मौत हो जाये तो देश का महान कानून में कोई राहत नही है । लेबर कमिश्नर कहता है कि इनके लिए कोई प्रावधान नही है।


अभी जो हेल्पलाइन चालू की गई है वो सिर्फ नम्बर दिखाने के लिए हैं पहले तो आपका फ़ोन लगेगा नही अगर लग गया तो पटक दिया जाएगा और उसमें से हसी के ठहाकों की आवाज़ के सिवा कुछ सुनाई नही देगा।


ये सारी बातें मेरे स्वंम के अनुभवों के आधार पर है

10 views

​​Call us:

+91 8800 1300 41

​Find us: 

SH 296, 2nd Floor, H Block, Shastri Nagar, Ghaziabad 201002 (Opposite: Uttam School)

Email: contact@labourissuewatch.org